उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जेहि पूँछउँ सोइ मुनि अस कहई। ईस्वर सर्ब भूतमय अहई।।
मूल पाठ
जेहि पूँछउँ सोइ मुनि अस कहई। ईस्वर सर्ब भूतमय अहई।।
निर्गुन मत नहिं मोहि सोहाई। सगुन ब्रह्म रति उर अधिकाई।।
स्रोत अभिलेख 7.11 · पुस्तक पृ. 1014, 1016
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिनसे मैं पूछता, वे ही मुनि ऐसा कहते कि ईश्वर सर्वभूतमय है। यह निर्गुण मत मुझे नहीं सुहाता था। हृदयमें सगुण ब्रह्मपर प्रीति बढ़ रही थी॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1016 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जेहि पूँछउँ सोइ मुनि अस कहई। ईस्वर सर्ब भूतमय अहई।।
English explanation
Every sage I asked said the same: God pervades all beings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिससे भी | whomever |
| पूँछउँ | मैं पूछता था | I would ask |
| सोइ | वही | that very |
| मुनि | मुनि | sage |
| अस | ऐसा | thus |
| कहई | कहता था | would say |
| ईस्वर | परमेश्वर | God |
| सर्ब | सभी | all |
| भूतमय | प्राणियों में व्याप्त | pervading beings |
| अहई | है | is |
2 निर्गुन मत नहिं मोहि सोहाई। सगुन ब्रह्म रति उर अधिकाई।।
English explanation
The teaching of the attributeless Absolute did not appeal to me; my heart held greater love for Brahman with attributes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निर्गुन | गुण और रूप से रहित ब्रह्म का | of the attributeless Absolute |
| मत | मत; सिद्धांत | teaching; doctrine |
| नहिं | नहीं | not |
| मोहि | मुझे | to me |
| सोहाई | रुचता था | was appealing |
| सगुन | गुण और रूप सहित | with attributes and form |
| ब्रह्म | परम सत्य; परमेश्वर | Brahman, the Supreme Reality |
| रति | प्रेम; अनुराग | love; devotion |
| उर | हृदय में | in my heart |
| अधिकाई | अधिक थी | was greater |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1016
- सहायक विषय
- गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1014, 1016
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