उत्तरकाण्ड · दोहा 110 (क) · दोहा
गुर के बचन सुरति करि राम चरन मनु लाग।
गुर के बचन सुरति करि राम चरन मनु लाग।
रघुपति जस गावत फिरउँ छन छन नव अनुराग॥ ११० (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.11 · पुस्तक पृ. 1014, 1016
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1गुर के बचन सुरति करि राम चरन मनु लाग।
AI प्रारूप: गुरु के वचनों का स्मरण करके मेरा मन राम के चरणों में लग गया।
English explanation
AI draft: Remembering my guru’s words, my mind became devoted to Rama’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु | the spiritual teacher |
| के | के | of |
| बचन | वचन; उपदेश | words; instruction |
| सुरति | स्मरण | remembrance |
| करि | करके | having done |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| मनु | मेरा मन | my mind |
| लाग | लग गया | became attached |
2रघुपति जस गावत फिरउँ छन छन नव अनुराग॥ ११० (क)॥
मैं रघुपति राम का यश गाता हुआ घूमता हूँ, हर क्षण नया प्रेम उमड़ता है।
English explanation
I wander singing Rama’s glory, with fresh love arising every moment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| जस | यश | glory |
| गावत | गाते हुए | singing |
| फिरउँ | मैं घूमता हूँ | I wander |
| छन | क्षण | moment |
| छन | क्षण; प्रत्येक क्षण | moment; every moment |
| नव | नया | fresh |
| अनुराग | प्रेम; अनुरक्ति | love; devotion |
| क | पद-संदर्भ चिह्न (क) | verse reference marker (क) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 110 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.11
- सहायक विषय
- गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1014, 1016
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।