उत्तरकाण्ड · दोहा 110 (ख) · दोहा
मेरु सिखर बट छायाँ मुनि लोमस आसीन।
मेरु सिखर बट छायाँ मुनि लोमस आसीन।
देखि चरन सिरु नायउँ बचन कहेउँ अति दीन॥ ११० (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.11 · पुस्तक पृ. 1014, 1016
भावार्थ और शब्दार्थ
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1मेरु सिखर बट छायाँ मुनि लोमस आसीन।
मेरु पर्वत के शिखर पर बरगद की छाया में लोमस मुनि बैठे थे।
English explanation
Sage Lomasa was seated in the shade of a banyan tree on Mount Meru’s summit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मेरु | मेरु पर्वत | Mount Meru |
| सिखर | शिखर पर | on the summit |
| बट | बरगद की | of a banyan tree |
| छायाँ | छाया में | in the shade |
| मुनि | ऋषि | sage |
| लोमस | लोमस ऋषि का नाम | Lomasa, the sage’s name |
| आसीन | बैठे हुए | seated |
2देखि चरन सिरु नायउँ बचन कहेउँ अति दीन॥ ११० (ख)॥
उन्हें देखकर मैंने उनके चरणों में सिर झुकाया और अत्यंत विनम्र वचन कहे।
English explanation
Seeing him, I bowed my head at his feet and spoke very humbly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen him |
| चरन | उनके चरणों में | at his feet |
| सिरु | सिर | my head |
| नायउँ | मैंने झुकाया | I bowed |
| बचन | वचन | words |
| कहेउँ | मैंने कहे | I spoke |
| अति | अत्यंत | very |
| दीन | विनम्र | humble |
| ख | पद-संदर्भ चिह्न (ख) | verse reference marker (ख) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 110 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.11
- सहायक विषय
- गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1014, 1016
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।