उत्तरकाण्ड · दोहा 110 (ग) · दोहा
सुनि मम बचन बिनीत मृदु मुनि कृपाल खगराज।
सुनि मम बचन बिनीत मृदु मुनि कृपाल खगराज।
मोहि सादर पूँछत भए द्विज आयहु केहि काज॥ ११० (ग)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.11 · पुस्तक पृ. 1014, 1016
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सुनि मम बचन बिनीत मृदु मुनि कृपाल खगराज।
हे पक्षिराज गरुड़, मेरे विनम्र और कोमल वचन सुनकर दयालु मुनि ने—
English explanation
O Garuda, king of birds, hearing my humble and gentle words, the compassionate sage—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मम | मेरे | my |
| बचन | वचन | words |
| बिनीत | विनम्र | humble |
| मृदु | कोमल; मृदुल | gentle; soft |
| मुनि | लोमस मुनि | sage Lomasa |
| कृपाल | दयालु | compassionate |
| खगराज | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
2मोहि सादर पूँछत भए द्विज आयहु केहि काज॥ ११० (ग)॥
मुझसे आदरपूर्वक पूछा, ‘हे ब्राह्मण, तुम किस काम से आए हो?’
English explanation
Respectfully asked me, ‘O Brahmin, for what purpose have you come?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोहि | मुझसे | of me |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| पूँछत | पूछने | asking |
| भए | लगे | began |
| द्विज | हे ब्राह्मण | O Brahmin |
| आयहु | तुम आए हो | you have come |
| केहि | किस | what |
| काज | काम से; प्रयोजन से | for a purpose |
| ग | पद-संदर्भ चिह्न (ग) | verse reference marker (ग) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 110 (ग)
- स्रोत अभिलेख
- 7.11
- सहायक विषय
- गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1014, 1016
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।