उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जुग बिधि ज्वर मत्सर अबिबेका। कहँ लागि कहौं कुरोग अनेका।।
मूल पाठ
जुग बिधि ज्वर मत्सर अबिबेका। कहँ लागि कहौं कुरोग अनेका।।
स्रोत अभिलेख 7.121 · पुस्तक पृ. 1032, 1035
भावार्थ
मूल पाठ के बादमत्सर और अविवेक दो प्रकारके ज्वर हैं। इस प्रकार अनेकों बुरे रोग हैं, जिन्हें कहाँतक कहूँ॥ १९॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1035 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जुग बिधि ज्वर मत्सर अबिबेका। कहँ लागि कहौं कुरोग अनेका।।
English explanation
Jealous rivalry and lack of discernment are two kinds of fever; how far can I go in describing these many harmful diseases?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जुग | दो | two |
| बिधि | प्रकार के | kinds of |
| ज्वर | ज्वर | fever |
| मत्सर | द्वेषपूर्ण ईर्ष्या | jealous rivalry |
| अबिबेका | विवेक का अभाव | lack of discernment |
| कहँ | कहाँ | how far |
| लागि | तक | up to |
| कहौं | मैं कहूँ | shall I describe |
| कुरोग | बुरे रोग | harmful diseases |
| अनेका | अनेक | many |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.121
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1035
- सहायक विषय
- गरुड़जीके सात प्रश्न तथा काकभुशुण्डिके उत्तर
- मुद्रित पृष्ठ
- 1032, 1035
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