उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जप तप मख सम दम ब्रत दाना। बिरति बिबेक जोग बिग्याना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअनेक जप, तप, यज्ञ, शम (मनको रोकना), दम (इन्द्रियोंको रोकना), व्रत, दान, वैराग्य, विवेक, योग, विज्ञान आदि सबका फल श्रीरघुनाथजीके चरणोंमें प्रेम होना है। इसके बिना कोई कल्याण नहीं पा सकता॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 997 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जप तप मख सम दम ब्रत दाना। बिरति बिबेक जोग बिग्याना।।
सब कर फल रघुपति पद प्रेमा। तेहि बिनु कोउ न पावइ छेमा।।
स्रोत अभिलेख 7.95 · पुस्तक पृ. 997, 997
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जप तप मख सम दम ब्रत दाना। बिरति बिबेक जोग बिग्याना।।
English explanation
Repetition of sacred names or formulas, austerity, sacrifice, restraint of mind and senses, vows, charity, detachment, discernment, yoga, and realized knowledge—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जप | नाम या मंत्र का जप | repetition of sacred names or formulas |
| तप | तपस्या | austerity |
| मख | यज्ञ | ritual sacrifice |
| सम | मन का संयम | restraint of mind |
| दम | इंद्रियों का संयम | restraint of the senses |
| ब्रत | व्रत | religious vows |
| दाना | दान | charity |
| बिरति | वैराग्य | detachment |
| बिबेक | विवेक | discernment |
| जोग | योग-साधना | yogic practice |
| बिग्याना | अनुभूत तत्त्वज्ञान | realized spiritual knowledge |
2 सब कर फल रघुपति पद प्रेमा। तेहि बिनु कोउ न पावइ छेमा।।
English explanation
The fruit of all these is love for Rama’s feet. Without that love, no one attains well-being.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | इन सब | all these |
| कर | का | of |
| फल | फल | fruit or result |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी श्रीराम के | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| पद | चरणों में | for the feet |
| प्रेमा | प्रेम | love |
| तेहि | उस प्रेम के | that love |
| बिनु | बिना | without |
| कोउ | कोई | anyone |
| न | नहीं | not |
| पावइ | पाता | attains |
| छेमा | कल्याण | well-being |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.95
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 997
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 997, 997
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।