उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि तन राम भगति मैं पाई। ताते मोहि ममता अधिकाई।।
मूल पाठ
एहि तन राम भगति मैं पाई। ताते मोहि ममता अधिकाई।।
जेहि तें कछु निज स्वारथ होई। तेहि पर ममता कर सब कोई।।
स्रोत अभिलेख 7.95 · पुस्तक पृ. 997, 997
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैंने इसी शरीरसे श्रीरामजीकी भक्ति प्राप्त की है। इसीसे इसपर मेरी ममता अधिक है। जिससे अपना कुछ स्वार्थ होता है, उसपर सभी कोई प्रेम करते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 997 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 एहि तन राम भगति मैं पाई। ताते मोहि ममता अधिकाई।।
English explanation
In this very body I attained devotion to Rama; therefore I feel greater attachment to this body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इसी | this very |
| तन | शरीर में | in the body |
| राम | श्रीराम की | to Rama |
| भगति | भक्ति | devotion |
| मैं | मैंने | I |
| पाई | प्राप्त की | attained |
| ताते | इसलिए | therefore |
| मोहि | मुझे | to me |
| ममता | इस शरीर से अपनापन | attachment to this body |
| अधिकाई | अधिक है | is greater |
2 जेहि तें कछु निज स्वारथ होई। तेहि पर ममता कर सब कोई।।
English explanation
Everyone feels attachment to that through which some personal good is achieved.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिससे | that which |
| तें | से, के द्वारा | through |
| कछु | कुछ | some |
| निज | अपना | one’s own |
| स्वारथ | हित या प्रयोजन | benefit or purpose |
| होई | सिद्ध होता है | is achieved |
| तेहि | उस | that |
| पर | पर | toward |
| ममता | ममता, अपनापन | attachment |
| कर | करता है | feels |
| सब | सब | every |
| कोई | व्यक्ति | person |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.95
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 997
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 997, 997
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।