उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जनमत मरत दुसह दुख होई। अहि स्वल्पउ नहिं ब्यापिहि सोई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपरन्तु जन्मने और मरनेमें जो दु:सह दु:ख होता है, इसको वह दु:ख जरा भी न व्यापेगा और किसी भी जन्ममें इसका ज्ञान नहीं मिटेगा। हे शूद्र! मेरा प्रामाणिक (सत्य) वचन सुन॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1013 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जनमत मरत दुसह दुख होई। अहि स्वल्पउ नहिं ब्यापिहि सोई।।
कवनेउँ जन्म मिटिहि नहिं ग्याना। सुनहि सूद्र मम बचन प्रवाना।।
स्रोत अभिलेख 7.109 · पुस्तक पृ. 1013, 1014
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जनमत मरत दुसह दुख होई। अहि स्वल्पउ नहिं ब्यापिहि सोई।।
English explanation
The unbearable suffering of birth and death will not afflict him even slightly; the reading ‘अहि’ is uncertain here.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनमत | जन्म लेते समय | while being born |
| मरत | मरते समय | while dying |
| दुसह | असह्य | unbearable |
| दुख | दुःख | suffering |
| होई | होता है | occurs |
| अहि | इसे; इस जीव को। | To him; to this being. |
| स्वल्पउ | थोड़ा भी | even slightly |
| नहिं | नहीं | not |
| ब्यापिहि | सताएगा | will afflict |
| सोई | वही दुःख | that suffering |
2 कवनेउँ जन्म मिटिहि नहिं ग्याना। सुनहि सूद्र मम बचन प्रवाना।।
English explanation
Your knowledge will not disappear in any birth. O Shudra, hear my assured word.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कवनेउँ | किसी भी | any whatsoever |
| जन्म | जन्म में | in a birth |
| मिटिहि | मिटेगा | will disappear |
| नहिं | नहीं | not |
| ग्याना | ज्ञान | knowledge |
| सुनहि | सुनो | listen |
| सूद्र | हे शूद्र | O member of the Shudra social class |
| मम | मेरा | my |
| बचन | वचन | word |
| प्रवाना | प्रमाणिक / सुनिश्चित | authoritative and assured |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.109
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1013
- सहायक विषय
- गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1013, 1014
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।