उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
छमासील जे पर उपकारी। ते द्विज मोहि प्रिय जथा खरारी।।
मूल पाठ
छमासील जे पर उपकारी। ते द्विज मोहि प्रिय जथा खरारी।।
मोर श्राप द्विज ब्यर्थ न जाइहि। जन्म सहस अवस्य यह पाइहि।।
स्रोत अभिलेख 7.109 · पुस्तक पृ. 1013, 1014
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे द्विज! जो क्षमाशील एवं परोपकारी होते हैं, वे मुझे वैसे ही प्रिय हैं जैसे खरारि श्रीरामचन्द्रजी। हे द्विज! मेरा शाप व्यर्थ नहीं जायगा। यह हजार जन्म अवश्य पावेगा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1013 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 छमासील जे पर उपकारी। ते द्विज मोहि प्रिय जथा खरारी।।
English explanation
O Brahmin, those who are forgiving and benefit others are as dear to me as Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छमासील | क्षमाशील | forgiving |
| जे | जो | those who |
| पर | दूसरों के | to others |
| उपकारी | हित करने वाले | benefactors |
| ते | वे | they |
| द्विज | हे ब्राह्मण | O Brahmin |
| मोहि | मुझे | to me |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| जथा | जैसे | just as |
| खरारी | खर के शत्रु श्रीराम | Rama, slayer of Khara |
2 मोर श्राप द्विज ब्यर्थ न जाइहि। जन्म सहस अवस्य यह पाइहि।।
English explanation
O Brahmin, my curse will not go in vain; he will surely undergo a thousand births.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोर | मेरा | my |
| श्राप | शाप | curse |
| द्विज | हे ब्राह्मण | O Brahmin |
| ब्यर्थ | निष्फल | in vain |
| न | नहीं | not |
| जाइहि | जाएगा | will go |
| जन्म | जन्म | births |
| सहस | एक हजार | a thousand |
| अवस्य | निश्चय ही | surely |
| यह | यह व्यक्ति | this person |
| पाइहि | पाएगा | will undergo |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.109
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1013
- सहायक विषय
- गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1013, 1014
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।