उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रघुपति पुरीं जन्म तब भयऊ। पुनि तैं मम सेवाँ मन दयऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[प्रथम तो] तेरा जन्म श्रीरघुनाथजीकी पुरीमें हुआ। फिर तूने मेरी सेवामें मन लगाया। पुरीके प्रभाव और मेरी कृपासे तेरे हृदयमें रामभक्ति उत्पन्न होगी॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1013 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रघुपति पुरीं जन्म तब भयऊ। पुनि तैं मम सेवाँ मन दयऊ।।
पुरी प्रभाव अनुग्रह मोरें। राम भगति उपजिहि उर तोरें।।
स्रोत अभिलेख 7.109 · पुस्तक पृ. 1013, 1014
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 रघुपति पुरीं जन्म तब भयऊ। पुनि तैं मम सेवाँ मन दयऊ।।
English explanation
You were born in Rama’s city, and then devoted your mind to my service; the reading ‘तब’ is uncertain here.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुपति | श्रीराम की | of Rama, lord of Raghu’s line |
| पुरीं | नगरी में | in the city |
| जन्म | जन्म | birth |
| तब | तब | then |
| भयऊ | हुआ | took place |
| पुनि | फिर | then |
| तैं | तुमने | you |
| मम | मेरी | my |
| सेवाँ | सेवा में | to service |
| मन | मन | your mind |
| दयऊ | दिया / लगाया | devoted |
2 पुरी प्रभाव अनुग्रह मोरें। राम भगति उपजिहि उर तोरें।।
English explanation
Through that city’s influence and my grace, devotion to Rama will arise in your heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुरी | नगरी का | of the city |
| प्रभाव | प्रभाव से | through the influence |
| अनुग्रह | कृपा से | through grace |
| मोरें | मेरी | my |
| राम | श्रीराम की | to Rama |
| भगति | भक्ति | devotion |
| उपजिहि | उत्पन्न होगी | will arise |
| उर | हृदय में | in the heart |
| तोरें | तुम्हारे | your |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.109
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1013
- सहायक विषय
- गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1013, 1014
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।