उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनु मम बचन सत्य अब भाई। हरितोषन ब्रत द्विज सेवकाई।।
मूल पाठ
सुनु मम बचन सत्य अब भाई। हरितोषन ब्रत द्विज सेवकाई।।
अब जनि करहि बिप्र अपमाना। जानेहु संत अनंत समाना।।
स्रोत अभिलेख 7.109 · पुस्तक पृ. 1013, 1014
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे भाई! अब मेरा सत्य वचन सुन। द्विजोंकी सेवा ही भगवान्को प्रसन्न करनेवाला व्रत है। अब कभी ब्राह्मणका अपमान न करना। संतोंको अनन्त श्रीभगवान्हीके समान जानना॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1013 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनु मम बचन सत्य अब भाई। हरितोषन ब्रत द्विज सेवकाई।।
English explanation
Brother, now hear my true words: service to Brahmins is a vow that pleases Hari.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| मम | मेरे | my |
| बचन | वचन | words |
| सत्य | सत्य | true |
| अब | अब | now |
| भाई | हे भाई | O brother |
| हरितोषन | हरि को प्रसन्न करने वाला | pleasing Hari, the Lord |
| ब्रत | व्रत | vow or observance |
| द्विज | ब्राह्मणों की | of Brahmins |
| सेवकाई | सेवा | service |
2 अब जनि करहि बिप्र अपमाना। जानेहु संत अनंत समाना।।
English explanation
Do not insult a Brahmin henceforth; regard saints as equal to the infinite Lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब से | henceforth |
| जनि | मत | do not |
| करहि | करो | do |
| बिप्र | ब्राह्मण का | a Brahmin’s |
| अपमाना | अपमान | insult |
| जानेहु | जानो / मानो | recognize or regard |
| संत | संतों को | saints |
| अनंत | अनंत भगवान के | the infinite Lord |
| समाना | समान | as equal to |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.109
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1013
- सहायक विषय
- गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1013, 1014
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