उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
इंद्र कुलिस मम सूल बिसाला। कालदंड हरि चक्र कराला।।
मूल पाठ
इंद्र कुलिस मम सूल बिसाला। कालदंड हरि चक्र कराला।।
जो इन्ह कर मारा नहिं मरई। बिप्रद्रोह पावक सो जरई।।
स्रोत अभिलेख 7.109 · पुस्तक पृ. 1013, 1014
भावार्थ
मूल पाठ के बादइन्द्रके वज्र, मेरे विशाल त्रिशूल, कालके दण्ड और श्रीहरिके विकराल चक्रके मारे भी जो नहीं मरता, वह भी विप्रदोहरूपी अग्रिसे भस्म हो जाता है॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1014 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 इंद्र कुलिस मम सूल बिसाला। कालदंड हरि चक्र कराला।।
English explanation
Indra’s thunderbolt, my mighty trident, Death’s rod, and Hari’s fearsome discus—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इंद्र | देवराज इंद्र का | of Indra, king of the gods |
| कुलिस | वज्र | thunderbolt |
| मम | मेरा | my |
| सूल | त्रिशूल | trident |
| बिसाला | विशाल | mighty |
| कालदंड | काल का दंड | Death’s rod |
| हरि | विष्णु का | of Vishnu |
| चक्र | चक्र | discus |
| कराला | भयंकर | fearsome |
2 जो इन्ह कर मारा नहिं मरई। बिप्रद्रोह पावक सो जरई।।
English explanation
Even one who does not die when struck by these burns in the fire of hostility toward a Brahmin.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो व्यक्ति | one who |
| इन्ह | इन हथियारों | these weapons |
| कर | से | by |
| मारा | प्रहार किया गया | struck |
| नहिं | नहीं | not |
| मरई | मरता | dies |
| बिप्रद्रोह | ब्राह्मण से द्रोह की | of hostility toward a Brahmin |
| पावक | आग में | in the fire |
| सो | वह | that person |
| जरई | जलता है | burns |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.109
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1014
- सहायक विषय
- गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1013, 1014
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।