उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस बिबेक राखेहु मन माहीं। तुम्ह कहँ जग दुर्लभ कछु नाहीं।।
मूल पाठ
अस बिबेक राखेहु मन माहीं। तुम्ह कहँ जग दुर्लभ कछु नाहीं।।
औरउ एक आसिषा मोरी। अप्रतिहत गति होइहि तोरी।।
स्रोत अभिलेख 7.109 · पुस्तक पृ. 1013, 1014
भावार्थ
मूल पाठ के बादऐसा विवेक मनमें रखना। फिर तुम्हारे लिये जगत्में कुछ भी दुर्लभ न होगा। मेरा एक और भी आशीर्वाद है कि तुम्हारी सर्वत्र अबाध गति होगी (अर्थात् तुम जहाँ जाना चाहोगे, वहीं बिना रोक-टोकके जा सकोगे)॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1014 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अस बिबेक राखेहु मन माहीं। तुम्ह कहँ जग दुर्लभ कछु नाहीं।।
English explanation
Keep such discernment in your mind; nothing in the world will be difficult for you to obtain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | such |
| बिबेक | विवेक | discernment |
| राखेहु | रखना | keep |
| मन | मन | the mind |
| माहीं | में | within |
| तुम्ह | तुम्हारे | you |
| कहँ | लिए | for |
| जग | संसार में | in the world |
| दुर्लभ | कठिनाई से मिलने वाला | hard to obtain |
| कछु | कुछ भी | anything |
| नाहीं | नहीं | not |
2 औरउ एक आसिषा मोरी। अप्रतिहत गति होइहि तोरी।।
English explanation
I give one further blessing: your movement will be unhindered.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| औरउ | और भी | further |
| एक | एक | one |
| आसिषा | आशीर्वाद | blessing |
| मोरी | मेरा | my |
| अप्रतिहत | बिना किसी बाधा के | unhindered |
| गति | गमन / आवागमन | movement or passage |
| होइहि | होगी | will be |
| तोरी | तुम्हारी | your |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.109
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1014
- सहायक विषय
- गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1013, 1014
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।