उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गुर पद प्रीति नीति रत जेई। द्विज सेवक अधिकारी तेई।।
मूल पाठ
गुर पद प्रीति नीति रत जेई। द्विज सेवक अधिकारी तेई।।
ता कहँ यह बिसेष सुखदाई। जाहि प्रानप्रिय श्रीरघुराई।।
स्रोत अभिलेख 7.128 · पुस्तक पृ. 1043, 1043
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिनकी गुरुके चरणोंमें प्रीति है, जो नीतिपरायण हैं और ब्राह्मणोंके सेवक हैं, वे ही इसके अधिकारी हैं, और उसको तो यह कथा बहुत ही सुख देनेवाली है, जिसको श्रीरघुनाथजी प्राणके समान प्यारे हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1043 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 गुर पद प्रीति नीति रत जेई। द्विज सेवक अधिकारी तेई।।
English explanation
Those who love their guru’s feet, are devoted to right conduct, and serve Brahmins are fit recipients of this story.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु के | of the guru |
| पद | चरणों में | at the feet |
| प्रीति | प्रेम | love |
| नीति | नीति और सदाचार में | in right conduct |
| रत | तत्पर | devoted |
| जेई | जो लोग | those who |
| द्विज | ब्राह्मणों के | of Brahmins |
| सेवक | सेवक | servants |
| अधिकारी | योग्य पात्र | qualified recipients |
| तेई | वे ही | those very people |
2 ता कहँ यह बिसेष सुखदाई। जाहि प्रानप्रिय श्रीरघुराई।।
English explanation
This story brings special joy to one to whom Rama, the revered lord of the Raghu lineage, is as dear as life itself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ता | उस व्यक्ति | that person |
| कहँ | को | to |
| यह | यह कथा | this story |
| बिसेष | विशेष रूप से | especially |
| सुखदाई | सुख देने वाली है | brings joy |
| जाहि | जिसे | to whom |
| प्रानप्रिय | प्राणों के समान प्रिय हैं | is as dear as life itself |
| श्रीरघुराई | श्रीरघुकुल के स्वामी राम | Rama, the revered lord of the Raghu lineage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.128
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1043
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1043, 1043
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।