उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
द्विज द्रोहिहि न सुनाइअ कबहूँ। सुरपति सरिस होइ नृप जबहूँ।।
मूल पाठ
द्विज द्रोहिहि न सुनाइअ कबहूँ। सुरपति सरिस होइ नृप जबहूँ।।
राम कथा के तेइ अधिकारी। जिन्ह कें सतसंगति अति प्यारी।।
स्रोत अभिलेख 7.128 · पुस्तक पृ. 1043, 1043
भावार्थ
मूल पाठ के बादब्राह्मणोंके द्रोहीको, यदि वह देवराज (इन्द्र) के समान ऐश्वर्यवान् राजा भी हो, तब भी यह कथा कभी न सुनानी चाहिये। श्रीरामकी कथाके अधिकारी वे ही हैं जिनको सत्संगति अत्यन्त प्रिय है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1043 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 द्विज द्रोहिहि न सुनाइअ कबहूँ। सुरपति सरिस होइ नृप जबहूँ।।
English explanation
Never narrate this story to someone hostile to Brahmins, even if he is a king comparable to Indra.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| द्विज | ब्राह्मणों के प्रति | toward Brahmins |
| द्रोहिहि | द्वेष रखने वाले को | to one who is hostile |
| न | नहीं | not |
| सुनाइअ | सुनानी चाहिए | should be narrated |
| कबहूँ | कभी भी | ever |
| सुरपति | देवताओं के राजा इंद्र के | to Indra, king of the gods |
| सरिस | समान | equal |
| होइ | हो | may be |
| नृप | राजा | a king |
| जबहूँ | भले ही | even if |
2 राम कथा के तेइ अधिकारी। जिन्ह कें सतसंगति अति प्यारी।।
English explanation
Those to whom the company of the good is very dear are fit to hear Rama’s story.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम की | of Lord Rama |
| कथा | कथा | story |
| के | के लिए | for |
| तेइ | वे ही | those very people |
| अधिकारी | योग्य पात्र | qualified recipients |
| जिन्ह | जिन | whom |
| कें | को | to |
| सतसंगति | सज्जनों का संग | the company of the good |
| अति | अत्यंत | very |
| प्यारी | प्रिय है | is dear |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.128
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1043
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1043, 1043
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