उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
यह न कहिअ सठही हठसीलहि। जो मन लाइ न सुन हरि लीलहि।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयह कथा उनसे न कहनी चाहिये जो शठ (धूर्त) हों, हठी स्वभावके हों और श्रीहरिकी लीलाको मन लगाकर न सुनते हों। लोभी, क्रोधी और कामीको, जो चराचरके स्वामी श्रीरामजीको नहीं भजते, यह कथा नहीं कहनी चाहिये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1043 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
यह न कहिअ सठही हठसीलहि। जो मन लाइ न सुन हरि लीलहि।।
कहिअ न लोभिहि क्रोधहि कामिहि। जो न भजइ सचराचर स्वामिहि।।
स्रोत अभिलेख 7.128 · पुस्तक पृ. 1043, 1043
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 यह न कहिअ सठही हठसीलहि। जो मन लाइ न सुन हरि लीलहि।।
English explanation
This story should not be told to a foolish, obstinate person who does not listen attentively to Hari’s deeds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह कथा | this story |
| न | नहीं | not |
| कहिअ | कहनी चाहिए | should be told |
| सठही | मूर्ख को | to a foolish person |
| हठसीलहि | हठी स्वभाव वाले को | to an obstinate person |
| जो | जो | who |
| मन | मन | the mind |
| लाइ | लगाकर | applying attentively |
| न | नहीं | not |
| सुन | सुनता | listens to |
| हरि | हरि अर्थात भगवान की | of Hari, the Lord |
| लीलहि | लीलाओं को | divine deeds |
2 कहिअ न लोभिहि क्रोधहि कामिहि। जो न भजइ सचराचर स्वामिहि।।
English explanation
It should not be told to a greedy, wrathful, or lustful person who does not worship the Lord of all moving and unmoving beings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहिअ | कहनी चाहिए | should be told |
| न | नहीं | not |
| लोभिहि | लोभी को | to a greedy person |
| क्रोधहि | क्रोधी को | to a wrathful person |
| कामिहि | कामासक्त को | to a lustful person |
| जो | जो | who |
| न | नहीं | not |
| भजइ | भजन करता | worships |
| सचराचर | समस्त चर और अचर जगत के | of all moving and unmoving beings |
| स्वामिहि | स्वामी को | the Lord |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.128
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1043
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1043, 1043
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।