उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कौसल्यादि मातु सब धाई। निरखि बच्छ जनु धेनु लवाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दकौसल्या आदि माताएँ ऐसे दौड़ीं मानो नयी ब्यायी हुई गौएँ अपने बछड़ोंको देखकर दौड़ी हों॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 913 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कौसल्यादि मातु सब धाई। निरखि बच्छ जनु धेनु लवाई।।
स्रोत अभिलेख 7.6 · पुस्तक पृ. 913, 913
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कौसल्यादि मातु सब धाई। निरखि बच्छ जनु धेनु लवाई।।
English explanation
All the mothers, including Kaushalya, rushed forward, like a newly calved cow upon seeing her calf.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौसल्यादि | कौसल्या आदि | Kaushalya and the others |
| मातु | माताएँ | mothers |
| सब | सभी | all |
| धाई | दौड़ पड़ीं | rushed forward |
| निरखि | देखकर | upon seeing |
| बच्छ | बछड़े को | her calf |
| जनु | मानो | as though |
| धेनु | गाय | a cow |
| लवाई | नई ब्याई हुई | newly calved |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 913
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 913, 913
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।