उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
जनु धेनु बालक बच्छ तजि गृहँ चरन बन परबस गईं।
मूल पाठ
जनु धेनु बालक बच्छ तजि गृहँ चरन बन परबस गईं।
दिन अंत पुर रुख स्रवत थन हुंकार करि धावत भईं॥
अति प्रेम प्रभु सब मातु भेटीं बचन मृदु बहुबिधि कहे।
गइ बिषम बिपति बियोगभव तिन्ह हरष सुख अगनित लहे॥
स्रोत अभिलेख 7.6 · पुस्तक पृ. 913, 913
भावार्थ
मूल पाठ के बादमानो नयी ब्यायी हुई गौएँ अपने छोटे बछड़ोंको घरपर छोड़ परवश होकर वनमें चरने गयी हों और दिनका अन्त होनेपर [बछड़ोंसे मिलनेके लिये] हुंकार करके थनसे दूध गिराती हुई नगरकी ओर दौड़ी हों। प्रभुने अत्यन्त प्रेमसे सब माताओंसे मिलकर उनसे बहुत प्रकारके कोमल वचन कहे। वियोगसे उत्पन्न भयानक विपत्ति दूर हो गयी और सबने [भगवान्से मिलकर और उनके वचन सुनकर] अगणित सुख और हर्ष प्राप्त किये।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 914 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1जनु धेनु बालक बच्छ तजि गृहँ चरन बन परबस गईं।
English explanation
As though cows, compelled to go, had left their little calves at home and gone to graze in the forest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनु | मानो | as though |
| धेनु | गायें | cows |
| बालक | नन्हे | little; young |
| बच्छ | बछड़े | calves |
| तजि | छोड़कर | having left |
| गृहँ | घर में | at home |
| चरन | चरने के लिए | to graze |
| बन | वन में | in the forest |
| परबस | विवश होकर | under compulsion |
| गईं | गईं | went |
2दिन अंत पुर रुख स्रवत थन हुंकार करि धावत भईं॥
English explanation
At day's end they began running toward the town, lowing, with milk flowing from their udders.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दिन | दिन के | of the day |
| अंत | अंत में | at the end |
| पुर | नगर की | of the town |
| रुख | ओर | in the direction |
| स्रवत | दूध झराते हुए | flowing with milk |
| थन | थन | udders |
| हुंकार | रँभाने की ध्वनि | lowing |
| करि | करके | making |
| धावत | दौड़ती हुई | running |
| भईं | हो गईं; दौड़ पड़ीं | began to do so |
3अति प्रेम प्रभु सब मातु भेटीं बचन मृदु बहुबिधि कहे।
English explanation
Lord Rama met all his mothers with deep affection and spoke gentle words in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | very; deeply |
| प्रेम | प्रेमपूर्वक | with affection |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| सब | सभी | all |
| मातु | माताओं से | his mothers |
| भेटीं | मिले | met |
| बचन | वचन | words |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बहुबिधि | अनेक प्रकार से | in many ways |
| कहे | कहे | spoke |
4गइ बिषम बिपति बियोगभव तिन्ह हरष सुख अगनित लहे॥
English explanation
Their terrible affliction born of separation passed away, and they found immeasurable joy and happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गइ | दूर हो गई | passed away |
| बिषम | भीषण; कठिन | terrible; severe |
| बिपति | विपत्ति | affliction |
| बियोगभव | वियोग से उत्पन्न | born of separation |
| तिन्ह | उन्होंने; उन माताओं ने | they; those mothers |
| हरष | हर्ष | joy |
| सुख | सुख | happiness |
| अगनित | अगणित; अपार | immeasurable |
| लहे | प्राप्त किए | obtained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 914
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 913, 913
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।