उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
को तुम्ह तात कहाँ ते आए। मोहि परम प्रिय बचन सुनाए।।
मूल पाठ
को तुम्ह तात कहाँ ते आए। मोहि परम प्रिय बचन सुनाए।।
मारुत सुत मैं कपि हनुमाना। नामु मोर सुनु कृपानिधाना।।
स्रोत अभिलेख 7.2 · पुस्तक पृ. 907, 908
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[भरतजीने पूछा—] हे तात! तुम कौन हो? और कहाँसे आये हो? [जो] तुमने मुझको [ये] परम प्रिय (अत्यन्त आनन्द देनेवाले) वचन सुनाये। [हनुमान्जीने कहा—] हे कृपानिधान! सुनिये, मैं पवनका पुत्र और जातिका वानर हूँ; मेरा नाम हनुमान् है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 908 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 को तुम्ह तात कहाँ ते आए। मोहि परम प्रिय बचन सुनाए।।
English explanation
Dear one, who are you, and where have you come from? You have told me words most dear to my heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| को | कौन | who |
| तुम्ह | आप | you |
| तात | हे प्रिय | dear one |
| कहाँ | कहाँ | where |
| ते | से | from |
| आए | आए हैं | have come |
| मोहि | मुझे | to me |
| परम | अत्यंत | most |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| बचन | वचन | words |
| सुनाए | सुनाए हैं | have told |
2 मारुत सुत मैं कपि हनुमाना। नामु मोर सुनु कृपानिधाना।।
English explanation
Listen, O treasure of compassion: I am a monkey, the son of the wind god; my name is Hanuman.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मारुत | पवनदेव | the wind god |
| सुत | पुत्र | son |
| मैं | मैं | I |
| कपि | वानर | a monkey |
| हनुमाना | हनुमान | Hanuman, Rama’s messenger |
| नामु | नाम | name |
| मोर | मेरा | my |
| सुनु | सुनिए | listen |
| कृपानिधाना | हे कृपा के भंडार | O treasure of compassion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 908
- सहायक विषय
- भरत-विरह तथा भरत-हनुमान्-मिलन, अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 907, 908
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।