उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रिपु रन जीति सुजस सुर गावत। सीता सहित अनुज प्रभु आवत।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दशत्रुको रणमें जीतकर सीताजी और लक्ष्मणजीसहित प्रभु आ रहे हैं; देवता उनका सुन्दर यश गा रहे हैं। ये वचन सुनते ही [भरतजीको] सारे दु:ख भूल गये। जैसे प्यासा आदमी अमृत पाकर प्यासके दु:खको भूल जाय॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 908 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रिपु रन जीति सुजस सुर गावत। सीता सहित अनुज प्रभु आवत।।
सुनत बचन बिसरे सब दूखा। तृषावंत जिमि पाइ पियूषा।।
स्रोत अभिलेख 7.2 · पुस्तक पृ. 907, 908
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 रिपु रन जीति सुजस सुर गावत। सीता सहित अनुज प्रभु आवत।।
English explanation
Having defeated the enemy in battle, Lord Rama is coming with Sita and his younger brother Lakshmana; the gods sing his glorious praise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रिपु | शत्रु को | the enemy |
| रन | युद्ध में | in battle |
| जीति | जीतकर | having defeated |
| सुजस | सुंदर यश | glorious renown |
| सुर | देवता | the gods |
| गावत | गा रहे हैं | are singing |
| सीता | राम की पत्नी सीता | Sita, Rama’s wife |
| सहित | के साथ | together with |
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण | younger brother Lakshmana |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| आवत | आ रहे हैं | is coming |
2 सुनत बचन बिसरे सब दूखा। तृषावंत जिमि पाइ पियूषा।।
English explanation
Hearing these words, Bharata forgot all his sorrows, like a thirsty person who receives nectar.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | upon hearing |
| बचन | वचन | the words |
| बिसरे | भूल गए | were forgotten |
| सब | सारे | all |
| दूखा | दुख | sorrows |
| तृषावंत | प्यासा व्यक्ति | a thirsty person |
| जिमि | जैसे | like |
| पाइ | पाकर | having received |
| पियूषा | अमृत | nectar |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 908
- सहायक विषय
- भरत-विरह तथा भरत-हनुमान्-मिलन, अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 907, 908
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।