उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जासु बिरहँ सोचहु दिन राती। रटहु निरंतर गुन गन पाँती।।
मूल पाठ
जासु बिरहँ सोचहु दिन राती। रटहु निरंतर गुन गन पाँती।।
रघुकुल तिलक सुजन सुखदाता। आयउ कुसल देव मुनि त्राता।।
स्रोत अभिलेख 7.2 · पुस्तक पृ. 907, 908
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिनके विरहमें आप दिन-रात सोच करते (घुलते) रहते हैं और जिनके गुण-समूहोंकी पंक्तियोंको आप निरन्तर रटते रहते हैं, वे ही रघुकुलके तिलक, सज्जनोंको सुख देनेवाले और देवताओं तथा मुनियोंके रक्षक श्रीरामजी सकुशल आ गये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 907 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जासु बिरहँ सोचहु दिन राती। रटहु निरंतर गुन गन पाँती।।
English explanation
He whose absence grieves you day and night, whose many virtues you continually recite—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जासु | जिनके | whose |
| बिरहँ | वियोग में | in separation |
| सोचहु | आप व्याकुल रहते हैं | you grieve |
| दिन | दिन | day |
| राती | रात | night |
| रटहु | आप दोहराते रहते हैं | you keep reciting |
| निरंतर | लगातार | continually |
| गुन | गुणों की | of virtues |
| गन | समूह | multitudes |
| पाँती | पंक्तियाँ | series |
2 रघुकुल तिलक सुजन सुखदाता। आयउ कुसल देव मुनि त्राता।।
English explanation
Rama, the glory of Raghu’s lineage, giver of joy to the good and protector of gods and sages, has arrived safely.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुकुल | रघु का वंश | Raghu’s lineage |
| तिलक | गौरवस्वरूप | crowning glory |
| सुजन | सज्जनों को | to good people |
| सुखदाता | सुख देने वाले | giver of happiness |
| आयउ | आ गए हैं | has arrived |
| कुसल | सकुशल | safely |
| देव | देवताओं के | of gods |
| मुनि | मुनियों के | of sages |
| त्राता | रक्षक | protector |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 907
- सहायक विषय
- भरत-विरह तथा भरत-हनुमान्-मिलन, अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 907, 908
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।