उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखत हनूमान अति हरषेउ। पुलक गात लोचन जल बरषेउ।।
मूल पाठ
देखत हनूमान अति हरषेउ। पुलक गात लोचन जल बरषेउ।।
मन महँ बहुत भाँति सुख मानी। बोलेउ श्रवन सुधा सम बानी।।
स्रोत अभिलेख 7.2 · पुस्तक पृ. 907, 908
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन्हें देखते ही हनुमान्जी अत्यन्त हर्षित हुए। उनका शरीर पुलकित हो गया, नेत्रोंसे [प्रेमाश्रुओंका] जल बरसने लगा। मनमें बहुत प्रकारसे सुख मानकर वे कानोंके लिये अमृतके समान वाणी बोले—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 907 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 देखत हनूमान अति हरषेउ। पुलक गात लोचन जल बरषेउ।।
English explanation
On seeing Bharata, Hanuman was overjoyed. His body thrilled, and tears poured from his eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखत | देखते ही | on seeing |
| हनूमान | राम के सेवक हनुमान | Hanuman, Rama’s servant |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| हरषेउ | हर्षित हुए | rejoiced |
| पुलक | रोमांच | a thrill of raised hair |
| गात | शरीर | body |
| लोचन | आँखों से | from the eyes |
| जल | आँसू | tears |
| बरषेउ | बरस पड़े | poured forth |
2 मन महँ बहुत भाँति सुख मानी। बोलेउ श्रवन सुधा सम बानी।।
English explanation
Feeling joy in many ways within his heart, Hanuman spoke words like nectar to the ears.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन | heart |
| महँ | में | within |
| बहुत | अनेक | many |
| भाँति | प्रकारों से | in ways |
| सुख | आनंद | joy |
| मानी | अनुभव करके | having felt |
| बोलेउ | बोले | spoke |
| श्रवन | कानों के लिए | to the ears |
| सुधा | अमृत | nectar |
| सम | के समान | like |
| बानी | वाणी | words |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 907
- सहायक विषय
- भरत-विरह तथा भरत-हनुमान्-मिलन, अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 907, 908
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