उत्तरकाण्ड · दोहा 1 (ख) · दोहा
बैठे देखि कुसासन जटा मुकुट कृस गात।
बैठे देखि कुसासन जटा मुकुट कृस गात।
राम राम रघुपति जपत स्रवत नयन जलजात॥ १ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.1 · पुस्तक पृ. 906, 907
भावार्थ और शब्दार्थ
1बैठे देखि कुसासन जटा मुकुट कृस गात।
हनुमान ने भरत को कुश के आसन पर बैठे देखा; उनके सिर पर जटाओं का मुकुट था और शरीर दुबला था।
English explanation
Hanuman saw Bharata seated on a mat of sacred grass, with his matted hair forming a crown and his body lean.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बैठे | बैठे हुए | seated |
| देखि | देखा | saw |
| कुसासन | कुश घास के आसन पर | on a seat of sacred grass |
| जटा | जटाओं का | of matted hair |
| मुकुट | मुकुट | crown |
| कृस | दुबला | lean |
| गात | शरीर | body |
2राम राम रघुपति जपत स्रवत नयन जलजात॥ १ (ख)॥
भरत रघुपति राम का नाम ‘राम, राम’ जप रहे थे और उनके कमल-समान नेत्रों से आँसू बह रहे थे।
English explanation
Bharata was repeating ‘Rama, Rama,’ the name of the lord of Raghu’s lineage, while tears flowed from his lotus-like eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम—जपा जा रहा नाम | Rama—the name being repeated |
| राम | राम—नाम की पुनरावृत्ति | Rama—the repeated name |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| जपत | जप रहे थे | was repeating in devotion |
| स्रवत | आँसू बह रहे थे | were shedding tears |
| नयन | नेत्र | eyes |
| जलजात | कमल-समान | lotus-like |
| ख | पद्यांश का संदर्भ-चिह्न ‘ख’ | verse-section reference marker ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 1 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.1
- सहायक विषय
- भरत-विरह तथा भरत-हनुमान्-मिलन, अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 906, 907
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।