उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहि दंडक बन पावनताई। गीध मइत्री पुनि तेहिं गाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्ददण्डकवनका पवित्र करना कहकर फिर भुशुण्डिजीने गृध्रराजके साथ मित्रताका वर्णन किया। फिर जिस प्रकार प्रभुने पञ्चवटीमें निवास किया और सब मुनियोंंके भयका नाश किया,॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 969 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कहि दंडक बन पावनताई। गीध मइत्री पुनि तेहिं गाई।।
पुनि प्रभु पंचवटीं कृत बासा। भंजी सकल मुनिन्ह की त्रासा।।
स्रोत अभिलेख 7.66 · पुस्तक पृ. 969, 970
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहि दंडक बन पावनताई। गीध मइत्री पुनि तेहिं गाई।।
English explanation
AI draft: After describing the sanctification of Dandaka forest, the narrator recounted Rama’s friendship with the vulture Jatayu.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कहकर; वर्णन करके | having described |
| दंडक | दंडक नामक | named Dandaka |
| बन | वन | forest |
| पावनताई | पवित्र होना | sanctification |
| गीध | गीध जटायु | the vulture Jatayu |
| मइत्री | मित्रता | friendship |
| पुनि | फिर | then |
| तेहिं | उसने; उस कथावाचक ने | he; that narrator |
| गाई | गाकर वर्णन किया | sang of; recounted |
2 पुनि प्रभु पंचवटीं कृत बासा। भंजी सकल मुनिन्ह की त्रासा।।
English explanation
Then he recounted how Lord Rama made his dwelling in Panchavati and dispelled all the sages’ fear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| पंचवटीं | पंचवटी में | in Panchavati |
| कृत | किया हुआ; किया | made; established |
| बासा | निवास | dwelling |
| भंजी | दूर की; मिटाई | dispelled |
| सकल | सभी | all |
| मुनिन्ह | मुनियों | the sages |
| की | की | of; belonging to |
| त्रासा | भय | fear |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.66
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 969
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 969, 970
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।