उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करउँ सदा रघुपति गुन गाना। सादर सुनहिं बिहंग सुजाना।।
मूल पाठ
करउँ सदा रघुपति गुन गाना। सादर सुनहिं बिहंग सुजाना।।
जब जब अवधपुरीं रघुबीरा। धरहिं भगत हित मनुज सरीरा।।
स्रोत अभिलेख 7.114 · पुस्तक पृ. 1021, 1022
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं यहाँ सदा श्रीरघुनाथजीके गुणोंका गान किया करता हूँ और चतुर पक्षी उसे आदरपूर्वक सुनते हैं। अयोध्यापुरीमें जब-जब श्रीरघुवीर भक्तोंके [हितके] लिये मनुष्यशरीर धारण करते हैं,॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1022 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 करउँ सदा रघुपति गुन गाना। सादर सुनहिं बिहंग सुजाना।।
English explanation
I always sing the virtues of Rama, lord of Raghu’s lineage, and discerning birds listen respectfully.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करउँ | मैं करता हूँ | I perform |
| सदा | सदा | always |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम के | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| गुन | गुणों का | the virtues |
| गाना | गायन | singing |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| सुनहिं | सुनते हैं | listen |
| बिहंग | पक्षी | birds |
| सुजाना | समझदार | discerning |
2 जब जब अवधपुरीं रघुबीरा। धरहिं भगत हित मनुज सरीरा।।
English explanation
Whenever Rama, hero of Raghu’s lineage, assumes a human body in Ayodhya for his devotees’ benefit—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| जब | जब भी | whenever |
| अवधपुरीं | अयोध्या नगरी में | in the city of Ayodhya |
| रघुबीरा | रघुकुल के वीर राम | Rama, hero of Raghu’s lineage |
| धरहिं | धारण करते हैं | assumes |
| भगत | भक्तों के | of devotees |
| हित | हित के लिए | for the benefit |
| मनुज | मानव | human |
| सरीरा | शरीर | body |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.114
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1022
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1021, 1022
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