उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब तब जाइ राम पुर रहऊँ। सिसुलीला बिलोकि सुख लहऊँ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतब-तब मैं जाकर श्रीरामजीकी नगरीमें रहता हूँ और प्रभुकी शिशुलीला देखकर सुख प्राप्त करता हूँ। फिर हे पक्षिराज! श्रीरामजीके शिशुरूपको हृदयमें रखकर मैं अपने आश्रममें आ जाता हूँ॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1022 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तब तब जाइ राम पुर रहऊँ। सिसुलीला बिलोकि सुख लहऊँ।।
पुनि उर राखि राम सिसुरूपा। निज आश्रम आवउँ खगभूपा।।
स्रोत अभिलेख 7.114 · पुस्तक पृ. 1021, 1022
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब तब जाइ राम पुर रहऊँ। सिसुलीला बिलोकि सुख लहऊँ।।
English explanation
Each time, I go and stay in Rama’s city, finding joy in watching his childhood deeds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| तब | हर उस अवसर पर | on each such occasion |
| जाइ | जाकर | having gone |
| राम | राम की | Rama’s |
| पुर | नगरी में | in the city |
| रहऊँ | मैं रहता हूँ | I stay |
| सिसुलीला | बाल्यकाल की लीलाएँ | childhood deeds and play |
| बिलोकि | देखकर | watching |
| सुख | आनंद | joy |
| लहऊँ | मैं पाता हूँ | I obtain |
2 पुनि उर राखि राम सिसुरूपा। निज आश्रम आवउँ खगभूपा।।
English explanation
Then, holding Rama’s child form in my heart, I return to my hermitage, O king of birds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| उर | हृदय में | in the heart |
| राखि | रखकर | holding |
| राम | भगवान राम का | of Lord Rama |
| सिसुरूपा | बालरूप | child form |
| निज | अपने | my own |
| आश्रम | आश्रम में | to the hermitage |
| आवउँ | मैं लौट आता हूँ | I return |
| खगभूपा | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.114
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1022
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1021, 1022
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।