उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कमठ पीठ जामहिं बरु बारा। बंध्या सुत बरु काहुहि मारा।।
मूल पाठ
कमठ पीठ जामहिं बरु बारा। बंध्या सुत बरु काहुहि मारा।।
फूलहिं नभ बरु बहुबिधि फूला। जीव न लह सुख हरि प्रतिकूला।।
स्रोत अभिलेख 7.122 · पुस्तक पृ. 1036, 1038
भावार्थ
मूल पाठ के बादकछुएकी पीठपर भले ही बाल उग आवें, बाँझका पुत्र भले ही किसीको मार डाले, आकाशमें भले ही अनेकों प्रकारके फूल खिल उठें; परन्तु श्रीहरिसे विमुख होकर जीव सुख नहीं प्राप्त कर सकता॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1037 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कमठ पीठ जामहिं बरु बारा। बंध्या सुत बरु काहुहि मारा।।
English explanation
Even if hair were to grow on a tortoise’s back, or a barren woman’s son were to kill someone—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कमठ | कछुए की | a tortoise’s |
| पीठ | पीठ पर | on the back |
| जामहिं | उग आएँ | were to grow |
| बरु | भले ही | even if |
| बारा | बाल | hair |
| बंध्या | बाँझ स्त्री का | a barren woman’s |
| सुत | पुत्र | son |
| बरु | भले ही | even if |
| काहुहि | किसी को | someone |
| मारा | मार दे | were to kill |
2 फूलहिं नभ बरु बहुबिधि फूला। जीव न लह सुख हरि प्रतिकूला।।
English explanation
Even if many kinds of flowers were to bloom in the sky, a being opposed to Hari cannot find happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फूलहिं | खिल जाएँ | were to bloom |
| नभ | आकाश में | in the sky |
| बरु | भले ही | even if |
| बहुबिधि | अनेक प्रकार के | of many kinds |
| फूला | फूल | flowers |
| जीव | जीव | a living being |
| न | नहीं | not |
| लह | पाता | obtains |
| सुख | सुख | happiness |
| हरि | भगवान हरि के | to Lord Hari |
| प्रतिकूला | विरुद्ध रहने वाला | opposed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.122
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1037
- सहायक विषय
- भजन-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1036, 1038
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