उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तृषा जाइ बरु मृगजल पाना। बरु जामहिं सस सीस बिषाना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमृगतृष्णाके जलको पीनेसे भले ही प्यास बुझ जाय, खरगोशके सिरपर भले ही सींग निकल आवें, अन्धकार भले ही सूर्यका नाश कर दे; परन्तु श्रीरामसे विमुख होकर जीव सुख नहीं पा सकता॥ ९॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1037 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तृषा जाइ बरु मृगजल पाना। बरु जामहिं सस सीस बिषाना।।
अंधकारु बरु रबिहि नसावै। राम बिमुख न जीव सुख पावै।।
स्रोत अभिलेख 7.122 · पुस्तक पृ. 1036, 1038
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तृषा जाइ बरु मृगजल पाना। बरु जामहिं सस सीस बिषाना।।
English explanation
Even if drinking a mirage could quench thirst, even if horns could grow on a hare’s head—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तृषा | प्यास | thirst |
| जाइ | मिट जाए | were to vanish |
| बरु | भले ही | even if |
| मृगजल | मरीचिका का जल | mirage-water |
| पाना | पीने से | by drinking |
| बरु | भले ही | even if |
| जामहिं | उग आएँ | were to grow |
| सस | खरगोश के | a hare’s |
| सीस | सिर पर | on the head |
| बिषाना | सींग | horns |
2 अंधकारु बरु रबिहि नसावै। राम बिमुख न जीव सुख पावै।।
English explanation
Even if darkness could destroy the sun, a being turned away from Rama cannot find happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अंधकारु | अंधकार | darkness |
| बरु | भले ही | even if |
| रबिहि | सूर्य को | the sun |
| नसावै | नष्ट कर दे | were to destroy |
| राम | राम से | from Rama |
| बिमुख | विमुख | turned away |
| न | नहीं | not |
| जीव | जीव | a living being |
| सुख | सुख | happiness |
| पावै | पाता | obtains |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.122
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1037
- सहायक विषय
- भजन-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1036, 1038
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