उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हिम ते अनल प्रगट बरु होई। बिमुख राम सुख पाव न कोई।।
मूल पाठ
हिम ते अनल प्रगट बरु होई। बिमुख राम सुख पाव न कोई।।
स्रोत अभिलेख 7.122 · पुस्तक पृ. 1036, 1038
भावार्थ
मूल पाठ के बादबर्फसे भले ही अग्रि प्रकट हो जाय (ये सब अनहोनी बातें चाहे हो जायँ), परन्तु श्रीरामसे विमुख होकर कोई भी सुख नहीं पा सकता॥ १०॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1037 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 हिम ते अनल प्रगट बरु होई। बिमुख राम सुख पाव न कोई।।
English explanation
Even if fire could arise from ice, no one turned away from Rama finds happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हिम | बर्फ | ice |
| ते | से | from |
| अनल | आग | fire |
| प्रगट | प्रकट | manifest |
| बरु | भले ही | even if |
| होई | हो जाए | were to become |
| बिमुख | विमुख | turned away |
| राम | राम से | from Rama |
| सुख | सुख | happiness |
| पाव | पाता | obtains |
| न | नहीं | not |
| कोई | कोई भी | anyone |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.122
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1037
- सहायक विषय
- भजन-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1036, 1038
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।