उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कछुक राम गुन कहेउँ बखानी। अब का कहौं सो कहहु भवानी।।
मूल पाठ
कछुक राम गुन कहेउँ बखानी। अब का कहौं सो कहहु भवानी।।
सुनि सुभ कथा उमा हरषानी। बोली अति बिनीत मृदु बानी।।
स्रोत अभिलेख 7.52 · पुस्तक पृ. 958, 958
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैंने श्रीरामजीके कुछ थोड़े-से गुण बखानकर कहे हैं। हे भवानी! सो कहो, अब और क्या कहूँ? श्रीरामजीकी मङ्गलमयी कथा सुनकर पार्वतीजी हॢषत हुईं और अत्यन्त विनम्र तथा कोमल वाणी बोलीं—॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 958 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कछुक राम गुन कहेउँ बखानी। अब का कहौं सो कहहु भवानी।।
English explanation
I have described some of Rama’s qualities in detail. Tell me, Bhavani, what I should speak of now.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कछुक | कुछ | some |
| राम | राम के | of Rama |
| गुन | गुण | qualities |
| कहेउँ | मैंने कहे | I have told |
| बखानी | विस्तार से वर्णन करके | describing in detail |
| अब | अब | now |
| का | क्या | what |
| कहौं | मैं कहूँ | should I say |
| सो | वह | that |
| कहहु | तुम बताओ | tell me |
| भवानी | हे पार्वती, शिव की पत्नी | O Parvati, Shiva’s consort |
2 सुनि सुभ कथा उमा हरषानी। बोली अति बिनीत मृदु बानी।।
English explanation
Hearing the auspicious account, Uma rejoiced and spoke in very humble, gentle words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सुभ | शुभ, मंगलमय | auspicious |
| कथा | कथा | account |
| उमा | पार्वती | Parvati |
| हरषानी | आनंदित हुईं | rejoiced |
| बोली | बोलीं | spoke |
| अति | अत्यंत | very |
| बिनीत | विनम्र | humble |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी में | in words |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.52
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 958
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 958, 958
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।