उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिमल कथा हरि पद दायनी। भगति होइ सुनि अनपायनी।।
मूल पाठ
बिमल कथा हरि पद दायनी। भगति होइ सुनि अनपायनी।।
उमा कहिउँ सब कथा सुहाई। जो भुसुंडि खगपतिहि सुनाई।।
स्रोत अभिलेख 7.52 · पुस्तक पृ. 958, 958
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह पवित्र कथा भगवान्के परमपदको देनेवाली है। इसके सुननेसे अविचल भक्ति प्राप्त होती है। हे उमा! मैंने वह सब सुन्दर कथा कही जो काकभुशुण्डिजीने गरुडज़ीको सुनायी थी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 958 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बिमल कथा हरि पद दायनी। भगति होइ सुनि अनपायनी।।
English explanation
This pure account grants access to Hari’s feet; hearing it brings unfailing devotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिमल | निर्मल | pure |
| कथा | कथा | account |
| हरि | भगवान हरि के | of Lord Hari |
| पद | चरण | feet |
| दायनी | प्रदान करने वाली | granting |
| भगति | भक्ति | devotion |
| होइ | होती है | arises |
| सुनि | सुनकर | upon hearing |
| अनपायनी | कभी न मिटने वाली | unfailing, enduring |
2 उमा कहिउँ सब कथा सुहाई। जो भुसुंडि खगपतिहि सुनाई।।
English explanation
Uma, I have told the entire beautiful account that Kakabhushundi narrated to Garuda, lord of birds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उमा | हे पार्वती | O Parvati |
| कहिउँ | मैंने कहा | I have told |
| सब | सारी | the entire |
| कथा | कथा | account |
| सुहाई | सुंदर, मनोहर | beautiful, pleasing |
| जो | जो | which |
| भुसुंडि | काकभुशुंडि ने | Kakabhushundi, the crow sage |
| खगपतिहि | पक्षियों के स्वामी गरुड़ को | to Garuda, lord of birds |
| सुनाई | सुनाई | narrated |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.52
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 958
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 958, 958
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।