उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धन्य धन्य मैं धन्य पुरारी। सुनेउँ राम गुन भव भय हारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे त्रिपुरारि! मैं धन्य हूँ, धन्य-धन्य हूँ जो मैंने जन्म-मृत्युके भयको हरण करनेवाले श्रीरामजीके गुण (चरित्र) सुने॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 958 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
धन्य धन्य मैं धन्य पुरारी। सुनेउँ राम गुन भव भय हारी।।
स्रोत अभिलेख 7.52 · पुस्तक पृ. 958, 958
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 धन्य धन्य मैं धन्य पुरारी। सुनेउँ राम गुन भव भय हारी।।
English explanation
O Shiva, I am blessed, blessed, truly blessed: I have heard Rama’s qualities, which dispel the fear of worldly existence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धन्य | धन्य | blessed |
| धन्य | धन्य | blessed |
| मैं | मैं | I |
| धन्य | धन्य हूँ | am blessed |
| पुरारी | हे त्रिपुर के संहारक शिव | O Shiva, destroyer of Tripura |
| सुनेउँ | मैंने सुने | I have heard |
| राम | राम के | of Rama |
| गुन | गुण | qualities |
| भव | संसार का | of worldly existence |
| भय | भय | fear |
| हारी | हरने वाले | dispelling |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.52
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 958
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 958, 958
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