उत्तरकाण्ड · दोहा 52 (क) · दोहा
तुम्हरी कृपाँ कृपायतन अब कृतकृत्य न मोह।
तुम्हरी कृपाँ कृपायतन अब कृतकृत्य न मोह।
जानेउँ राम प्रताप प्रभु चिदानंद संदोह॥ ५२ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.52 · पुस्तक पृ. 958, 958
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1तुम्हरी कृपाँ कृपायतन अब कृतकृत्य न मोह।
AI-प्रारूप: हे कृपा के धाम! आपकी कृपा से अब मैं कृतार्थ हूँ; मेरा मोह नहीं रहा।
English explanation
AI draft: O abode of compassion, by your grace I am now fulfilled; my delusion is gone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्हरी | आपकी | your |
| कृपाँ | कृपा से | through grace |
| कृपायतन | हे कृपा के धाम | O abode of compassion |
| अब | अब | now |
| कृतकृत्य | कृतार्थ; जिसका उद्देश्य पूरा हो गया | fulfilled; having accomplished one's purpose |
| न | नहीं रहा | no longer present |
| मोह | मोह; भ्रम | delusion; bewilderment |
2जानेउँ राम प्रताप प्रभु चिदानंद संदोह॥ ५२ (क)॥
AI-प्रारूप: मैंने राम का प्रताप जान लिया है; प्रभु चेतना और आनंद की राशि हैं।
English explanation
AI draft: I have come to know Rama's glory; the Lord is the fullness of consciousness and bliss.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानेउँ | मैंने जान लिया | I have come to know |
| राम | श्रीराम का | of Rama |
| प्रताप | प्रताप; महिमा और सामर्थ्य | glory and might |
| प्रभु | प्रभु; भगवान राम | the Lord, Rama |
| चिदानंद | चेतना और आनंद | consciousness and bliss |
| संदोह | राशि; पूर्ण समुच्चय | fullness; aggregate |
| क | दोहा ५२ के प्रथम भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the first part of verse 52 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 52 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.52
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 958, 958
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।