उत्तरकाण्ड · दोहा 51 · दोहा
प्रेम सहित मुनि नारद बरनि राम गुन ग्राम।
प्रेम सहित मुनि नारद बरनि राम गुन ग्राम।
सोभासिंधु हृदयँ धरि गए जहाँ बिधि धाम॥ ५१॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.51 · पुस्तक पृ. 957, 957
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1प्रेम सहित मुनि नारद बरनि राम गुन ग्राम।
एआई-प्रारूप अर्थ: मुनि नारद ने प्रेमपूर्वक राम के अनेक गुणों का वर्णन किया।
English explanation
AI-draft meaning: Sage Narada lovingly described Rama’s many virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रेम | प्रेम | love |
| सहित | के साथ | with |
| मुनि | ऋषि | sage |
| नारद | नारद मुनि | Narada, the divine sage |
| बरनि | वर्णन करके | having described |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| गुन | गुणों का | virtues |
| ग्राम | समूह | multitude |
2सोभासिंधु हृदयँ धरि गए जहाँ बिधि धाम॥ ५१॥
एआई-प्रारूप अर्थ: शोभा के सागर राम को हृदय में धारण करके नारद वहाँ गए जहाँ ब्रह्मा का धाम है।
English explanation
AI-draft meaning: Holding Rama, the ocean of beauty, in his heart, Narada went to where Brahma’s abode is.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोभासिंधु | शोभा के सागर राम को | Rama, the ocean of beauty |
| हृदयँ | हृदय में | in his heart |
| धरि | धारण करके | having held |
| गए | चले गए | went |
| जहाँ | जहाँ | where |
| बिधि | ब्रह्मा का | Brahma’s |
| धाम | निवासस्थान है | abode is |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 51
- स्रोत अभिलेख
- 7.51
- सहायक विषय
- नारदजीका आना और स्तुति करके ब्रह्मलोकको लौट जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 957, 957
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