उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ऐसेहिं हरि बिनु भजन खगेसा। मिटइ न जीवन्ह केर कलेसा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे पक्षिराज! इसी प्रकार श्रीहरिके भजन बिना जीवोंका क्लेश नहीं मिटता। श्रीहरिके सेवकको अविद्या नहीं व्यापती। प्रभुकी प्रेरणासे उसे विद्या व्यापती है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 982 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
ऐसेहिं हरि बिनु भजन खगेसा। मिटइ न जीवन्ह केर कलेसा।।
हरि सेवकहि न ब्याप अबिद्या। प्रभु प्रेरित ब्यापइ तेहि बिद्या।।
स्रोत अभिलेख 7.79 · पुस्तक पृ. 982, 982
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ऐसेहिं हरि बिनु भजन खगेसा। मिटइ न जीवन्ह केर कलेसा।।
English explanation
Likewise, O Garuda, king of birds, living beings’ suffering does not cease without devotion to Hari.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ऐसेहिं | इसी प्रकार | likewise |
| हरि | हरि, भगवान | Hari, the Lord |
| बिनु | बिना | without |
| भजन | भजन; भक्तिपूर्ण स्मरण | devotional worship and remembrance |
| खगेसा | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| मिटइ | मिटता है | ceases |
| न | नहीं | not |
| जीवन्ह | जीवों का | of living beings |
| केर | का | of |
| कलेसा | क्लेश; दुःख | distress; suffering |
2 हरि सेवकहि न ब्याप अबिद्या। प्रभु प्रेरित ब्यापइ तेहि बिद्या।।
English explanation
Ignorance does not envelop Hari’s servant; knowledge pervades him through the Lord’s prompting.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरि | हरि, भगवान | Hari, the Lord |
| सेवकहि | सेवक को | the servant |
| न | नहीं | not |
| ब्याप | व्यापती; प्रभाव डालती | pervades; affects |
| अबिद्या | अविद्या; अज्ञान | ignorance |
| प्रभु | प्रभु द्वारा | by the Lord |
| प्रेरित | प्रेरित; संचालित | prompted; directed |
| ब्यापइ | व्याप्त होती है | pervades |
| तेहि | उस सेवक में | in that servant |
| बिद्या | विद्या; ज्ञान | knowledge |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.79
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 982
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 982, 982
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।