उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ताते नास न होइ दास कर। भेद भगति भाढ़इ बिहंगबर।।
मूल पाठ
ताते नास न होइ दास कर। भेद भगति भाढ़इ बिहंगबर।।
भ्रम ते चकित राम मोहि देखा। बिहँसे सो सुनु चरित बिसेषा।।
स्रोत अभिलेख 7.79 · पुस्तक पृ. 982, 982
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे पक्षिश्रेष्ठ! इसीसे दासका नाश नहीं होता और भेद-भक्ति बढ़ती है। श्रीरामजीने मुझे जब भ्रमसे चकित देखा, तब वे हँसे। वह विशेष चरित्र सुनिये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 982 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ताते नास न होइ दास कर। भेद भगति भाढ़इ बिहंगबर।।
English explanation
Therefore the servant is not destroyed; O foremost bird, awareness of distinction increases devotion. The reading ‘भाढ़इ’ is uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ताते | इसलिए | therefore |
| नास | नाश | destruction |
| न | नहीं | not |
| होइ | होता है | occurs |
| दास | सेवक | the servant |
| कर | का | of |
| भेद | भेद-बोध; प्रभु और सेवक का अंतर | awareness of the distinction between Lord and servant |
| भगति | भक्ति | devotion |
| भाढ़इ | संभवतः बढ़ती है | probably increases |
| बिहंगबर | हे श्रेष्ठ पक्षी गरुड़ | O Garuda, foremost among birds |
2 भ्रम ते चकित राम मोहि देखा। बिहँसे सो सुनु चरित बिसेषा।।
English explanation
Rama saw me bewildered by delusion and smiled. Now hear that remarkable episode.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भ्रम | भ्रम; मोह | delusion; confusion |
| ते | से; के कारण | because of |
| चकित | चकित; विस्मित | bewildered; astonished |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| मोहि | मुझे, काकभुशुण्डि को | me, Kakabhushundi |
| देखा | देखा | saw |
| बिहँसे | मुस्कराए | smiled |
| सो | वह | that |
| सुनु | सुनो | listen to |
| चरित | चरित; घटना | episode; deed |
| बिसेषा | विशेष; अद्भुत | remarkable; extraordinary |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.79
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 982
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 982, 982
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।