उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेहि कौतुक कर मरमु न काहूँ। जाना अनुज न मातु पिताहूँ।।
मूल पाठ
तेहि कौतुक कर मरमु न काहूँ। जाना अनुज न मातु पिताहूँ।।
जानु पानि धाए मोहि धरना। स्यामल गात अरुन कर चरना।।
स्रोत अभिलेख 7.79 · पुस्तक पृ. 982, 982
भावार्थ
मूल पाठ के बादउस खेलका मर्म किसीने नहीं जाना, न छोटे भाइयोंने और न माता-पिताने ही। वे श्याम शरीर और लाल-लाल हथेली और चरणतलवाले बालरूप श्रीरामजी घुटने और हाथोंके बल मुझे पकडऩेको दौड़े॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 982 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तेहि कौतुक कर मरमु न काहूँ। जाना अनुज न मातु पिताहूँ।।
English explanation
No one understood the secret of that wondrous play—not his younger brothers, his mother, or even his father.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उस | that |
| कौतुक | कौतुक; अद्भुत खेल | wondrous play |
| कर | का | of |
| मरमु | मर्म; गूढ़ आशय | secret; inner meaning |
| न | नहीं | not |
| काहूँ | किसी ने | anyone |
| जाना | जाना; समझा | knew; understood |
| अनुज | छोटे भाई | younger brothers |
| न | न; और न | nor |
| मातु | माता | mother |
| पिताहूँ | पिता ने भी | even his father |
2 जानु पानि धाए मोहि धरना। स्यामल गात अरुन कर चरना।।
English explanation
Rama hurried on his knees and hands to catch me; his body was dark, and his hands and feet were reddish.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानु | घुटनों के बल | on his knees |
| पानि | हाथों के बल | on his hands |
| धाए | दौड़े; तेजी से चले | hurried; rushed |
| मोहि | मुझे | me |
| धरना | पकड़ने के लिए | to catch |
| स्यामल | साँवला | dark-hued |
| गात | शरीर | body |
| अरुन | लालिमा लिए हुए | reddish |
| कर | हाथ | hands |
| चरना | चरण; पैर | feet |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.79
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 982
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 982, 982
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।