उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब मैं भागि चलेउँ उरगामी। राम गहन कहँ भुजा पसारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे सर्पोंके शत्रु गरुडज़ी! तब मैं भाग चला। श्रीरामजीने मुझे पकडऩेके लिये भुजा फैलायी। मैं जैसे-जैसे आकाशमें दूर उड़ता, वैसे-वैसे ही वहाँ श्रीहरिकी भुजाको अपने पास देखता था॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 982 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तब मैं भागि चलेउँ उरगामी। राम गहन कहँ भुजा पसारी।।
जिमि जिमि दूरि उड़ाउँ अकासा। तहँ भुज हरि देखउँ निज पासा।।
स्रोत अभिलेख 7.79 · पुस्तक पृ. 982, 982
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तब मैं भागि चलेउँ उरगामी। राम गहन कहँ भुजा पसारी।।
English explanation
Then I fled, flying away; Rama stretched out his arm to catch me. The reading ‘उरगामी’ is uncertain here.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| मैं | मैं, काकभुशुण्डि | I, Kakabhushundi |
| भागि | भागकर | fleeing |
| चलेउँ | चल पड़ा | went away |
| उरगामी | ऊपर की ओर उड़ते हुए; आकाश की ओर जाते हुए। | Flying upward; heading into the sky. |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| गहन | पकड़ने | catching |
| कहँ | के लिए | in order to |
| भुजा | भुजा; बाँह | arm |
| पसारी | फैलाई | stretched out |
2 जिमि जिमि दूरि उड़ाउँ अकासा। तहँ भुज हरि देखउँ निज पासा।।
English explanation
As I fly farther and farther into the sky, I still see Hari’s arm close beside me there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिमि | ज्यों | as |
| जिमि | ज्यों | as |
| दूरि | दूर | farther away |
| उड़ाउँ | मैं उड़ता हूँ | I fly |
| अकासा | आकाश में | in the sky |
| तहँ | वहाँ | there |
| भुज | भुजा; बाँह | arm |
| हरि | हरि की, यहाँ राम की | of Hari, here Rama |
| देखउँ | मैं देखता हूँ | I see |
| निज | अपने | my own |
| पासा | पास | near; beside |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.79
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 982
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 982, 982
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।