उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ए सब सखा सुनहु मुनि मेरे। भए समर सागर कहँ बेरे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[फिर गुरुजीसे कहा—] हे मुनि! सुनिये। ये सब मेरे सखा हैं। ये संग्रामरूपी समुद्रमें मेरे लिये बेड़े (जहाज) के समान हुए। मेरे हितके लिये इन्होंने अपने जन्मतक हार दिये (अपने प्राणोंतकको होम दिया)। ये मुझे भरतसे भी अधिक प्रिय हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 915 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
ए सब सखा सुनहु मुनि मेरे। भए समर सागर कहँ बेरे।।
मम हित लागि जन्म इन्ह हारे। भरतहु ते मोहि अधिक पिआरे।।
स्रोत अभिलेख 7.8 · पुस्तक पृ. 915, 916
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 ए सब सखा सुनहु मुनि मेरे। भए समर सागर कहँ बेरे।।
English explanation
‘Listen, O sage: these are all my friends; they became rafts for crossing the ocean of battle.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ए | ये | these |
| सब | सभी | all |
| सखा | मित्र | friends |
| सुनहु | सुनिए | listen |
| मुनि | हे मुनि | O sage |
| मेरे | मेरे | my |
| भए | बने | became |
| समर | युद्धरूपी | of battle |
| सागर | समुद्र | ocean |
| कहँ | के लिए | for |
| बेरे | बेड़े, पार उतारने के साधन | rafts, means of crossing |
2 मम हित लागि जन्म इन्ह हारे। भरतहु ते मोहि अधिक पिआरे।।
English explanation
‘For my sake they devoted their lives; they are dearer to me even than Bharata.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मम | मेरे | my |
| हित | हित | benefit |
| लागि | के लिए | for the sake of |
| जन्म | जीवन | lives |
| इन्ह | इन्होंने | they |
| हारे | अर्पित कर दिए | gave up in devotion |
| भरतहु | भरत से भी | even Bharata |
| ते | से | than |
| मोहि | मुझे | to me |
| अधिक | अधिक | more |
| पिआरे | प्रिय | dear |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 915
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 915, 916
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