उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि रघुपति सब सखा बोलाए। मुनि पद लागहु सकल सिखाए।।
मूल पाठ
पुनि रघुपति सब सखा बोलाए। मुनि पद लागहु सकल सिखाए।।
गुर बसिष्ट कुलपूज्य हमारे। इन्ह की कृपाँ दनुज रन मारे।।
स्रोत अभिलेख 7.8 · पुस्तक पृ. 915, 916
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर श्रीरघुनाथजीने सब सखाओंको बुलाया और सबको सिखाया कि मुनिके चरणोंमें लगो। ये गुरु वसिष्ठजी हमारे कुलभरके पूज्य हैं। इन्हींकी कृपासे रणमें राक्षस मारे गये हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 915 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पुनि रघुपति सब सखा बोलाए। मुनि पद लागहु सकल सिखाए।।
English explanation
Then Rama called all his friends and instructed them all, ‘Bow at the sage’s feet.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम ने | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| सब | सभी | all |
| सखा | मित्रों को | friends |
| बोलाए | बुलाया | called |
| मुनि | मुनि वसिष्ठ के | the sage Vashishtha’s |
| पद | चरणों में | at the feet |
| लागहु | प्रणाम करो | bow down |
| सकल | सबको | all of them |
| सिखाए | निर्देश दिया | instructed |
2 गुर बसिष्ट कुलपूज्य हमारे। इन्ह की कृपाँ दनुज रन मारे।।
English explanation
‘Guru Vashishtha is revered by our lineage; by his grace we slew the demons in battle.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु | spiritual teacher |
| बसिष्ट | ऋषि वसिष्ठ | the sage Vashishtha |
| कुलपूज्य | कुल के पूजनीय | revered by the lineage |
| हमारे | हमारे | our |
| इन्ह | इन गुरु वसिष्ठ | this revered sage |
| की | की | of |
| कृपाँ | कृपा से | by grace |
| दनुज | राक्षसों को | the demons |
| रन | युद्ध में | in battle |
| मारे | मारा | slew |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 915
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 915, 916
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