उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरत सनेह सील ब्रत नेमा। सादर सब बरनहिं अति प्रेमा।।
मूल पाठ
भरत सनेह सील ब्रत नेमा। सादर सब बरनहिं अति प्रेमा।।
देखि नगरबासिन्ह कै रीती। सकल सराहहि प्रभु पद प्रीती।।
स्रोत अभिलेख 7.8 · पुस्तक पृ. 915, 916
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे सब भरतजीके प्रेम, सुन्दर स्वभाव, [त्यागके] व्रत और नियमोंकी अत्यन्त प्रेमसे आदरपूर्वक बड़ाई कर रहे हैं। और नगरनिवासियोंकी [प्रेम, शील और विनयसे पूर्ण] रीति देखकर वे सब प्रभुके चरणोंमें उनके प्रेमकी सराहना कर रहे हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 915 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भरत सनेह सील ब्रत नेमा। सादर सब बरनहिं अति प्रेमा।।
English explanation
Everyone describes Bharata’s love, character, vows, and disciplined observances with great affection and respect.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत के | Bharata’s |
| सनेह | प्रेम | love |
| सील | सदाचार | virtuous character |
| ब्रत | व्रत | vows |
| नेमा | नियमित अनुशासित आचरण | disciplined observances |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| सब | सभी | everyone |
| बरनहिं | वर्णन करते हैं | describe |
| अति | बहुत | great |
| प्रेमा | प्रेम से | with affection |
2 देखि नगरबासिन्ह कै रीती। सकल सराहहि प्रभु पद प्रीती।।
English explanation
Seeing the townspeople’s conduct, they all praise their love for the Lord’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | seeing |
| नगरबासिन्ह | नगरवासियों | the townspeople |
| कै | की | of |
| रीती | रीति और आचरण | ways and conduct |
| सकल | सभी | all |
| सराहहि | सराहते हैं | praise |
| प्रभु | प्रभु राम के | Lord Rama’s |
| पद | चरणों में | at the feet |
| प्रीती | प्रेम | love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 915
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 915, 916
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