उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि प्रभु बचन मगन सब भए। निमिष निमिष उपजत सुख नए।।
मूल पाठ
सुनि प्रभु बचन मगन सब भए। निमिष निमिष उपजत सुख नए।।
स्रोत अभिलेख 7.8 · पुस्तक पृ. 915, 916
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभुके वचन सुनकर सब प्रेम और आनन्दमें मग्र हो गये। इस प्रकार पल-पलमें उन्हें नये- नये सुख उत्पन्न हो रहे हैं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 916 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनि प्रभु बचन मगन सब भए। निमिष निमिष उपजत सुख नए।।
English explanation
Hearing the Lord’s words, all became absorbed in joy; fresh happiness arose at every moment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | hearing |
| प्रभु | प्रभु राम के | Lord Rama’s |
| बचन | वचन | words |
| मगन | आनंद में मग्न | absorbed in joy |
| सब | सभी | all |
| भए | हो गए | became |
| निमिष | क्षण | moment |
| निमिष | क्षण; हर क्षण | moment; every moment |
| उपजत | उत्पन्न होता था | arose |
| सुख | सुख | happiness |
| नए | नया-नया | fresh |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 916
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 915, 916
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।