उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि बिधि सकल जीव जग रोगी। सोक हरष भय प्रीति बियोगी।।
मूल पाठ
एहि बिधि सकल जीव जग रोगी। सोक हरष भय प्रीति बियोगी।।
मानक रोग कछुक मैं गाए। हहिं सब कें लखि बिरलेन्ह पाए।।
स्रोत अभिलेख 7.122 · पुस्तक पृ. 1036, 1038
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस प्रकार जगत्में समस्त जीव रोगी हैं, जो शोक, हर्ष, भय, प्रीति और वियोगके दु:खसे और भी दुखी हो रहे हैं। मैंने ये थोड़े-से मानस-रोग कहे हैं। ये हैं तो सबको, परन्तु इन्हें जान पाये हैं कोई विरले ही॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1036 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 एहि बिधि सकल जीव जग रोगी। सोक हरष भय प्रीति बियोगी।।
English explanation
AI draft: Thus all living beings in the world are afflicted—with sorrow, joy, fear, attachment, and separation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | manner |
| सकल | सभी | all |
| जीव | जीव | living beings |
| जग | जगत में | in the world |
| रोगी | रोगग्रस्त | afflicted |
| सोक | शोक | sorrow |
| हरष | हर्ष | joy |
| भय | भय | fear |
| प्रीति | प्रेम या लगाव | love or attachment |
| बियोगी | वियोग से पीड़ित | afflicted by separation |
2 मानक रोग कछुक मैं गाए। हहिं सब कें लखि बिरलेन्ह पाए।।
English explanation
I have described a few maladies of the mind; they exist in everyone, but only a few have recognized them. The reading ‘मानक’ is uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मानक | मानसिक | mental |
| रोग | रोग | maladies |
| कछुक | कुछ | a few |
| मैं | मैंने | I |
| गाए | वर्णन किए | have described |
| हहिं | हैं | are present |
| सब | सभी | everyone |
| कें | में | in |
| लखि | पहचान | recognizing |
| बिरलेन्ह | विरले लोगों ने | a rare few |
| पाए | पाया है | have managed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.122
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1036
- सहायक विषय
- भजन-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1036, 1038
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।