उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एतना मन आनत खगराया। रघुपति प्रेरित ब्यापी माया।।
मूल पाठ
एतना मन आनत खगराया। रघुपति प्रेरित ब्यापी माया।।
सो माया न दुखद मोहि काहीं। आन जीव इव संसृत नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 7.78 · पुस्तक पृ. 981, 981
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे पक्षिराज! मनमें इतनी [शङ्का] लाते ही श्रीरघुनाथजीके द्वारा प्रेरित माया मुझपर छा गयी। परन्तु वह माया न तो मुझे दु:ख देनेवाली हुई और न दूसरे जीवोंकी भाँति संसारमें डालनेवाली हुई॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 981 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 एतना मन आनत खगराया। रघुपति प्रेरित ब्यापी माया।।
English explanation
AI-generated draft interpretation: O Garuda, king of birds, as soon as I entertained this thought, illusion prompted by Rama spread over me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एतना | इतना; यह विचार | this much; this thought |
| मन | मन में | in the mind |
| आनत | लाते ही | upon bringing to mind |
| खगराया | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम द्वारा | by Rama, lord of Raghu’s lineage |
| प्रेरित | प्रेरित; संचालित | prompted; set in motion |
| ब्यापी | छा गई | spread over me |
| माया | माया; मोह उत्पन्न करने वाली शक्ति | maya; the power producing delusion |
2 सो माया न दुखद मोहि काहीं। आन जीव इव संसृत नाहीं।।
English explanation
That maya caused me no suffering at all; unlike other beings, I did not become bound to worldly existence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह | that |
| माया | माया; मोहकारी शक्ति | maya; the deluding power |
| न | नहीं | not |
| दुखद | दुःख देने वाली | causing suffering |
| मोहि | मुझे | to me |
| काहीं | किसी भी प्रकार; तनिक भी | in any way; at all |
| आन | अन्य | other |
| जीव | जीवों | living beings |
| इव | के समान | like |
| संसृत | संसार का बंधन; जन्म-मरण का चक्र | worldly bondage; the cycle of birth and death |
| नाहीं | नहीं हुआ | did not occur |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.78
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 981
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 981, 981
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।