उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अवध प्रभाव जान तब प्रानी। जब उर बसहिं रामु धनुपानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअवधका प्रभाव जीव तभी जानता है, जब हाथमें धनुष धारण करनेवाले श्रीरामजी उसके हृदयमें निवास करते हैं। हे गरुडज़ी! वह कलिकाल बड़ा कठिन था। उसमें सभी नर-नारी पाप- परायण (पापोंमें लिप्त) थे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 999 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अवध प्रभाव जान तब प्रानी। जब उर बसहिं रामु धनुपानी।।
सो कलिकाल कठिन उरगारी। पाप परायन सब नर नारी।।
स्रोत अभिलेख 7.97 · पुस्तक पृ. 999, 999
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अवध प्रभाव जान तब प्रानी। जब उर बसहिं रामु धनुपानी।।
English explanation
A person understands Ayodhya’s power only when Rama, the bearer of the bow, dwells in their heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अवध | अयोध्या का | of Ayodhya |
| प्रभाव | प्रभाव या महिमा | power or glory |
| जान | जानता है | understands |
| तब | तभी | only then |
| प्रानी | प्राणी या व्यक्ति | a person or living being |
| जब | जब | when |
| उर | हृदय में | in the heart |
| बसहिं | बसते हैं | dwells |
| रामु | भगवान राम | Lord Rama |
| धनुपानी | हाथ में धनुष रखने वाले | holding a bow in his hand |
2 सो कलिकाल कठिन उरगारी। पाप परायन सब नर नारी।।
English explanation
O Garuda, enemy of serpents! That age of Kali was harsh; all men and women were given over to sin.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह | that |
| कलिकाल | कलियुग का समय | the age of Kali |
| कठिन | कठिन या कठोर | harsh or difficult |
| उरगारी | हे सर्पों के शत्रु गरुड़ | O Garuda, enemy of serpents |
| पाप | पाप में | to sin |
| परायन | परायण या लगे हुए | given over |
| सब | सभी | all |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.97
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 999
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 999, 999
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।