उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अब जाना मैं अवध प्रभावा। निगमागम पुरान अस गावा।।
मूल पाठ
अब जाना मैं अवध प्रभावा। निगमागम पुरान अस गावा।।
कवनेहुँ जन्म अवध बस जोई। राम परायन सो परि होई।।
स्रोत अभिलेख 7.97 · पुस्तक पृ. 999, 999
भावार्थ
मूल पाठ के बादअब मैंने अवधका प्रभाव जाना। वेद, शास्त्र और पुराणोंने ऐसा गाया है कि किसी भी जन्ममें जो कोई भी अयोध्यामें बस जाता है, वह अवश्य ही श्रीरामजीके परायण हो जायगा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 999 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अब जाना मैं अवध प्रभावा। निगमागम पुरान अस गावा।।
English explanation
Now I have understood Ayodhya’s power. The Vedas, Agamas, and Puranas proclaim the following:
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| जाना | जान लिया है | have understood |
| मैं | मैंने | I |
| अवध | अयोध्या का | of Ayodhya |
| प्रभावा | प्रभाव या महिमा | power or glory |
| निगमागम | वेद और आगम शास्त्र | the Vedas and Agama scriptures |
| पुरान | पुराण | the Puranas |
| अस | ऐसा | thus |
| गावा | कहते या गाते हैं | proclaim or sing |
2 कवनेहुँ जन्म अवध बस जोई। राम परायन सो परि होई।।
English explanation
Whoever dwells in Ayodhya in any lifetime becomes devoted to Rama. The supplied word ‘परि’ is uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कवनेहुँ | किसी भी | in any |
| जन्म | जन्म में | lifetime |
| अवध | अयोध्या में | in Ayodhya |
| बस | बसता है | dwells |
| जोई | जो कोई | whoever |
| राम | भगवान राम के | to Lord Rama |
| परायन | परायण या समर्पित | devoted |
| सो | वह | that person |
| परि | अवश्य; निश्चित रूप से। | Certainly; without fail. |
| होई | होता है | becomes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.97
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 999
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 999, 999
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।