उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धन मद मत्त परम बाचाला। उग्रबुद्धि उर दंभ बिसाला।।
मूल पाठ
धन मद मत्त परम बाचाला। उग्रबुद्धि उर दंभ बिसाला।।
जदपि रहेउँ रघुपति रजधानी। तदपि न कछु महिमा तब जानी।।
स्रोत अभिलेख 7.97 · पुस्तक पृ. 999, 999
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं धनके मदसे मतवाला, बहुत ही बकवादी और उग्रबुद्धिवाला था; मेरे हृदयमें बड़ा भारी दम्भ था। यद्यपि मैं श्रीरघुनाथजीकी राजधानीमें रहता था, तथापि मैंने उस समय उसकी महिमा कुछ भी नहीं जानी॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 999 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 धन मद मत्त परम बाचाला। उग्रबुद्धि उर दंभ बिसाला।।
English explanation
I was intoxicated with pride in wealth, excessively talkative, and fierce-minded; great conceit filled my heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धन | धन का | of wealth |
| मद | घमंड | pride |
| मत्त | मतवाला | intoxicated |
| परम | अत्यंत | extremely |
| बाचाला | बकवादी | talkative |
| उग्रबुद्धि | उग्र बुद्धि वाला | fierce-minded |
| उर | हृदय में | in the heart |
| दंभ | दंभ या अहंकार | conceit or arrogance |
| बिसाला | बहुत बड़ा | immense |
2 जदपि रहेउँ रघुपति रजधानी। तदपि न कछु महिमा तब जानी।।
English explanation
Although I lived in Rama’s capital, I understood nothing of its glory at that time.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जदपि | यद्यपि | although |
| रहेउँ | मैं रहा | I lived |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम की | of Rama, lord of the Raghu lineage |
| रजधानी | राजधानी में | in the capital |
| तदपि | फिर भी | nevertheless |
| न | नहीं | not |
| कछु | कुछ भी | anything at all |
| महिमा | महिमा | glory |
| तब | उस समय | at that time |
| जानी | जानी या समझी | knew or understood |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.97
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 999
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 999, 999
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