उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेहि कलिजुग कोसलपुर जाई। जन्मत भयउँ सूद्र तनु पाई।।
मूल पाठ
तेहि कलिजुग कोसलपुर जाई। जन्मत भयउँ सूद्र तनु पाई।।
सिव सेवक मन क्रम अरु बानी। आन देव निंदक अभिमानी।।
स्रोत अभिलेख 7.97 · पुस्तक पृ. 999, 999
भावार्थ
मूल पाठ के बादउस कलियुगमें मैं अयोध्यापुरीमें जाकर शूद्रका शरीर पाकर जन्मा। मैं मन, वचन और कर्मसे शिवजीका सेवक और दूसरे देवताओंकी निन्दा करनेवाला अभिमानी था॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 999 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तेहि कलिजुग कोसलपुर जाई। जन्मत भयउँ सूद्र तनु पाई।।
English explanation
AI draft: In that age of Kali, I went to Kosalpur (Ayodhya) and was born with a Shudra body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उस | that |
| कलिजुग | कलियुग में | in the age of Kali |
| कोसलपुर | कोसल की नगरी अयोध्या | Ayodhya, the city of Kosala |
| जाई | जाकर | having gone |
| जन्मत | जन्म लेना | taking birth |
| भयउँ | मैं हुआ | I came to be |
| सूद्र | शूद्र वर्ण का | of the Shudra social class |
| तनु | शरीर | body |
| पाई | पाकर | having obtained |
2 सिव सेवक मन क्रम अरु बानी। आन देव निंदक अभिमानी।।
English explanation
I served Shiva in thought, deed, and speech, but disparaged other deities and was arrogant.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिव | भगवान शिव का | of Lord Shiva |
| सेवक | सेवक या भक्त | servant or devotee |
| मन | मन से | in thought |
| क्रम | कर्म से | in deed |
| अरु | और | and |
| बानी | वाणी से | in speech |
| आन | अन्य | other |
| देव | देवताओं का | of deities |
| निंदक | निंदा करने वाला | one who disparages |
| अभिमानी | अभिमान से भरा | arrogant |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.97
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 999
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 999, 999
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