उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अब सुनु परम बिमल मम बानी। सत्य सुगम निगमादि बखानी।।
मूल पाठ
अब सुनु परम बिमल मम बानी। सत्य सुगम निगमादि बखानी।।
निज सिद्धांत सुनावउँ तोही। सुनु मन धरु सब तजि भजु मोही।।
स्रोत अभिलेख 7.86 · पुस्तक पृ. 988, 988
भावार्थ
मूल पाठ के बादअब मेरी सत्य, सुगम, वेदादिके द्वारा वर्णित परम निर्मल वाणी सुन। मैं तुझको यह 'निज सिद्धान्त सुनाता हूँ। सुनकर मनमें धारण कर और सब तजकर मेरा भजन कर॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 988 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1अब सुनु परम बिमल मम बानी। सत्य सुगम निगमादि बखानी।।
English explanation
AI draft: Now listen to my supremely pure words, which are true, easy to understand, and expounded in the Vedas and other scriptures.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| सुनु | सुनो | listen |
| परम | अत्यंत | supremely |
| बिमल | निर्मल | pure |
| मम | मेरी | my |
| बानी | वाणी | words |
| सत्य | सत्य | true |
| सुगम | सहज समझ में आने वाली | easy to understand |
| निगमादि | वेद आदि में | in the Vedas and other scriptures |
| बखानी | वर्णित | expounded |
2 निज सिद्धांत सुनावउँ तोही। सुनु मन धरु सब तजि भजु मोही।।
English explanation
I tell you my own teaching. Listen, hold it in your mind, and, leaving all else, worship me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपना | my own |
| सिद्धांत | निश्चित मत या शिक्षा | settled teaching |
| सुनावउँ | मैं सुनाता हूँ | I tell |
| तोही | तुम्हें | to you |
| सुनु | सुनो | listen |
| मन | मन में | in your mind |
| धरु | धारण करो | hold firmly |
| सब | सब कुछ | everything else |
| तजि | छोड़कर | leaving aside |
| भजु | भजन करो | worship |
| मोही | मुझे | me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.86
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 988
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 988, 988
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।