उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अति दुर्लभ कैवल्य परम पद। संत पुरान निगम आगम बद।।
मूल पाठ
अति दुर्लभ कैवल्य परम पद। संत पुरान निगम आगम बद।।
राम भजत सोइ मुकुति गोसाई। अनइच्छित आवइ बरिआई।।
स्रोत अभिलेख 7.119 · पुस्तक पृ. 1029, 1030
भावार्थ
मूल पाठ के बादसंत, पुराण, वेद और [तन्त्र आदि] शास्त्र [सब] यह कहते हैं कि कैवल्यरूप परमपद अत्यन्त दुर्लभ है; किन्तु हे गोसाईं! वही [अत्यन्त दुर्लभ] मुक्ति श्रीरामजीको भजनेसे बिना इच्छा किये भी जबरदस्ती आ जाती है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1029 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अति दुर्लभ कैवल्य परम पद। संत पुरान निगम आगम बद।।
English explanation
The supreme state of kaivalya is exceedingly rare—so declare the saints, the Puranas, the Vedas, and the Agamas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| दुर्लभ | कठिनाई से प्राप्त होने वाला | rarely attained |
| कैवल्य | कैवल्यरूपी मुक्ति | liberation called kaivalya |
| परम | सर्वोच्च | supreme |
| पद | अवस्था | state |
| संत | संतजन | saints |
| पुरान | पुराण ग्रंथ | the Puranas |
| निगम | वेद | the Vedas |
| आगम | आगम शास्त्र | the Agama scriptures |
| बद | कहते हैं | declare |
2 राम भजत सोइ मुकुति गोसाई। अनइच्छित आवइ बरिआई।।
English explanation
O revered sir, when one worships Rama, that very liberation comes unbidden, even insistently.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम का | Lord Rama |
| भजत | भजन करने पर | upon worshipping |
| सोइ | वही | that very |
| मुकुति | मुक्ति | liberation |
| गोसाई | हे स्वामी | O revered sir |
| अनइच्छित | बिना इच्छा किए भी | even without being desired |
| आवइ | आ जाती है | comes |
| बरिआई | बलपूर्वक | insistently |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.119
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1029
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1029, 1030
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